दूध कब कितना और कैसे पिए। | When and how to drink milk

When and how to drink milk

आयुर्वेद के अनुसार दूध कब कितना और कैसे पीना चाहिए। – How much and how to drink milk according to Ayurveda.

दोस्तों दूध एकमात्र ऐसी चीज है। जो संपूर्ण भोजन के बराबर होता है और एक बच्चे को जन्म के बाद सबसे पहले दूध ही पिल्या जाता हैं। दूध में सभी तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं। इसलिए दूध को भारतीय भोजन का आंतरिक हिस्सा कहा जाता हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन ए, बी 1, बी 2, बी 12, और विटामिन डी, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। लेकिन अच्छी से अच्छी चीज का इस्तेमाल अगर गलत तरीके से करते हैं, तो उसका हमें फायदा होने के वजय नुक्सान हो जाता हैं। अगर दूध को सही समय सही तरीके और सही क्वांटिटी में पिया जाये तो यह अम्रत के समान हैं।

अक्सर देखा गया हैं कि बच्चो को तो दूध पिने के लिए बार बार कहा जाता हैं, जबकि घर के अन्य सदस्य दूध पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। जबकि बड़ो और बच्चो दोनों के लिए दूध उतना ही जरुरी होता हैं।

दूध में केमिकल रिएक्शन करने की अटेंडेंसी काफी ज्यादा होती है। इसलिए अगर आप दूध का गलत मात्रा में गलत तरीके से और गलत चीजो के साथ इस्तेमाल करने से अपचन, खट्टी डकारे, उलटी, गैस, कब्ज, सीने में जलन और स्किन जैसे समस्याए हो सकती हैं।

शाकाहारियों के लिए दूध।

शाकाहारियों के लिए दूध एक सबसे बेस्ट ऑप्शन है। आधा किलो दूध आपको एक पाव मांस व तीन अंडों से अधिक पोषण देता हैं। एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर भी हमेशा दूध को प्रेफर करते हैं आयुर्वेद में भी दूध को अहम बताया है। लेकिन क्या आपको पता हैं बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर  दूध कब कितना और कैसे पिए।

तो आज हम यही जानेगे कि दूध कब कितना और कैसे पिए। एक दिन में ज्यादा से ज्यादा कितना दूध पिया जा सकता हैं। दूध पिने का सही समय क्या हैं। दूध कैसा पीना चाहिए यानि ठंडा या गरम। भेंस का या गाय का। वजन बढ़ने और वजन घटने वाले लोगों को किस तरह का दूध पीना चाहिए। किन लोगों को दूध पीना चाहिए और किन लोगों को नहीं, दूध किन किन चीजो के साथ पीना सही रहता हैं और किन किन चीजो के साथ गलत – तो चलिए जानते हैं। कि दूध कब कितना और कैसे पिए। 

एक दिन में कितना दूध पीना सही हैं।

हर साल 1 जून को विश्व मिल्क दिवस मनाया जाता है। ताकि दूध पीने की अहमियत और दूध के फायदे के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके। ज्यादातर लोग दूध का सेवन सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है, कि दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं। लेकिन हकीकत में ये है कि दूध में कैल्शियम के अलावा भी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है।

उम्र के अनुसार दूध।

जन्म से लेकर 6 महीने तक बच्चे को डॉक्टर सिर्फ माँ का दूध पिलाने के लिए बोलते हैं। क्योंकि इस समय बच्चे के विकास के लिए ज्यादा पोषण की आवश्यकता होती हैं। जोकि सिर्फ माँ के दूध से ही मिल सकता हैं।

100 ग्राम दूध में लगभग 125 मिलीग्राम कैल्शियम होता हैं।

1 से 3 साल तक के बच्चे का रोजाना करीब 350 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। और इसीलिए बच्चे को इस उम्र में रोजाना करीब 100 से 200 मिलीलीटर दूध जरूर पिलाना चाहिए। और बाकि बचा कैल्शियम दूसरे खाने से मिल जाता हैं।

4 से 10 साल तक के बच्चों को रोजाना करीब 450 से 500 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। और इसके लिए रोजाना बच्चो को 200 से 300 मिलीलीटर दूध जरुर देना चाहिए।

11 से 18 साल तक के बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी के साथ होता है। इस उम्र में दूध जरुर पीना चाहिए। इस उमे में बच्चो को 800 से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसलिए 18 साल तक के किशोर बच्चों को रोजाना करीब 2 गिलास दूध जरूर पिलाना चाहिए।

18 से ऊपर सभी उम्र के व्यक्तियों को 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। 18 साल से ऊपर के व्यक्तियों को एक दिन में 600 ग्राम यानि दो से तीन गिलास दूध पीना चाहिए।

दूध पिने का सही समय क्या हैं।

वैसे तो दूध को दिन में किसी भी समय पिया जा सकता हैं। लेकिन आयुवेद में दूध पिने का सही समय रात को सोने से आधे घंटे पहले बताया गया हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ आशुतोष गौतम के अनुसार अगर आप दूध पीते हैं, तो या तो आप इसे सुबह के समय पिए या फिर रात को सोने से पहले तभी दूध आपके लिए सेहतमंद साबित होगा।

अगर आप दूध को ओर भी हेअलथी बनाना चाहते हैं। तो आप रात को सोने से पहले इसने अश्वगंधा या त्रिफला मिला कर पी सकते हैं। दूध के साथ तो अश्वगंधा लेने से गहरी और अच्छी नींद आती हैं।

आपको बता दें कि रात को सोने से पहले दूध पिने को क्यों कहा जाता हैं। क्योंकि यह पाचन गुणों से भरपूर होता है। दूध सोने में मदद करता है। क्योंकि यह सेरोटोनिन हार्मोन रिलीज करता है, जो दिमाग को शांत करने का काम करता है।

आयुर्वेद के अनुसार, रात को दूध तब पीना चाहिए जब आपको खाना खाए 2 से 3 घंटे बीत गए हो।

दूध कैसा होना चाहिए यानि ठंडा या गरम।

दूध ठंडा पिए या गरम इसे लेकर लोग काफी कंफ्यूज रहते हैं। दूध ठंडा और गरम दोनों तरह से पिया जा सकता हैं। यह आप पर निर्भर करता हैं कि कैसा दूध आपके लिए सही हैं।

जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हैं। गरम या गुनगुना दूध पीना चाहिए। क्योंकि दूध पचने में थोडा हैवी होता हैं। और जब आप ठंडा या फ्रीज़ में रखा दूध पिटे हैं, तो वो और भी ज्यादा हैवी हो जाता हैं। जिसे पचाने के लिए लीवर को काफी महेनत करनी पड़ती हैं। और जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हैं। यानि जिन्हें बार बार बुखार या जुखाम होता हैं उन्हें हमेशा गरम दूध ही पीना चाहिए।

ठंडा दूध पीना भी कई तरह से फायदेमंद साबित होता हैं। खासकर जब आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम है, तो आप ठंड दूध पी सकते हैं क्योंकि गर्म दूध इसे और बढ़ा सकता है।

पानी की कमी में आप ठंडा दूध पी सकते हैं। क्योंकि ठंडा दूध पानी कि कमी को पूरा करता हैं।

दूध गाय का पिये या भेस का।

यह बात तो हम जानते ही हैं कि दूध में कई सारे पोषक तत्व मौजोद होते हैं।लेकिन जब बात भेंस या गाय के दूध की आती हैं, तो समझ नहीं आता कौन सा दूध पिए।

सबसे पहले दूध के गढ़ेपन की बात करे, तो भेंस का दूध ज्यादा गढ़ा होता हैं। भेंस के दूध में गाय के दूध से ज्यादा फैट होता हैं।  गाय के दूध में 3-4 % फैट होता है। जबकि भैंस के दूध में 7-8 % फैट पाया जाता हैं।

भैंस का दूध भारी होता है।. इसलिए इसे पचने में काफी समय लगता है। अगर आप पाचन तंत्र थोडा कमजोर हैं, तो आप गाय का दूध पी सकते हैं।

भेंस के दूध में गाय के दूध कि अपेक्षा फैट, कैलोरी, प्रोटीन अधिक पाए जाते हैं। अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो भेंस का दूध पिए और यदि आप वजन घटना चाहते हैं तो गाय का दूध पिए।

किन लोगों को दूध पीना चाहिए और किन लोगों को नहीं।

वैसे तो दूध पीना सभी के लिए फायदेमंद होता हैं। दूध उन लोगों के लिए अमृत की तरह है। जो लोग वात और पित्त प्रवृत्ति के है। और जो लोग कफ प्रवृत्ति के है। यानि जिन्हें सांस से संबंधित कोई बीमारी है। और जिन लोगों का थायरॉयड, कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ हैं। ऐसे लोगों को दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

दूध में लैक्टोज़ पाया जाता हैं।लैक्टोज़ एक प्रकार कि सुगर है। इसी के कारण दूध मीठा होता हैं। जिन लोगों को लैक्टोज से एलर्जी होती है, और जिनका पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें दूध का सेवन नहीं करना चाहिए, वरना पेट में एसिड बनने लगता है। जो शरीर की आंतरिक प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे लोगों को गैस, कब्ज, सीने में जलन और त्वचा की एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को कोई बड़ा घाव या उनके शरीर की कोई सर्जरी हुई हो, उन्हें घाव ठीक होने तक दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

दूध किन चीजो के साथ पीना सही हैं और किन चोजो के साथ गलत।

ज्यादातर लोग दूध को और मीठा करने के लिए चीनी का इस्तेमाल करते हैं। जोकि बिलकुल गलत हैं। अगर आपको मीठा दूध पीना पसंद हैं, तो आप शहद, गुड या मिश्री का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, पाचन के दौरान केला, स्ट्रॉबेरी, अनानास, संतरे जैसे फल पेट में गर्मी बढ़ाते हैं। और वहीं, दूध की प्रकृति ठंडी होती है। दूध और फलों की प्रकृति पूरी तरह से पद जाने के कारण पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण  सर्दी, खांसी, जुकाम, एलर्जी जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।

मांस मछली नमकीन और चटपटी चीजों के साथ भी दूध का सेवन बिलकुल गलत होता है। वरना आपको पेट से जुडी समस्याए हो सकती हैं। दूध और दूसरे खाने के बीच कम से कम दो घंटे का गेप होना चाहिए।

दूध कब कब नहीं पीना चाहिए।

कुछ लोग खाना खाने के तुरंत बाद दूध पी लेते हैं। जबकि दूध अपने आप में एक सम्पूर्ण भोजन हैं। मतलब एक समय के खाने के बराबर। लेकिन जब हम खाना खाने के तुरंत बाद दूध पी लेते हैं, तो इसका मतलब दो टाइम का खाना एक साथ खा लेना जिसके कारण पेट में भारीपन महसूस होता हैं। जिसके कारण आपको पेट में दर्द, गैस, सीने में जलन जैसी समस्याए हो सकती हैं।

दूध का सेवन खाना खाने के दो घंटे बाद और सोने से आधे घंटे पहले करना चाहिए।

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इस पोस्ट के द्वारा हमने आपको सही और संपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है कि दूध कब कितना और कैसे पिए। अगर आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमेंट करके जरूर बताएं। यदि आपको कोई सवाल का जवाब है तो उसे भी जरूर लिखें।

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Kapil Kumar: Kapil Kumar is the chief health advisor and the founder of "JagatHealth". he has a very deep interest in all health topics whatever. His passion, dedication and ability to make quick decisions sets him apart from others.

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